‘सफलता’ हमारी छोटी छोटी कोशिशों का नतीजा

‘धन्यवाद’ से करें दिन की शुरुआत यह छोटा सा शब्द न सिर्फ आपके संबंधों में मजबूती लाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आप दूसरे के प्रयासों को सम्मान देते हैं।

किसी को धन्यवाद या थैंक्यू कहना एक सामान्य चलन है, जिसे अक्सर विभिन्न परंपराओं से जोड़कर देखा जाता है। यह मात्र एक शब्द नहीं बल्कि एक संस्कार भी है जो हमें परिवार व समाज से ही नहीं बल्कि अपने कार्यस्थल से भी मिलता है। यह शब्द व्यक्ति को अपनेपन का एहसास कराता है। यह एक ऐसा संस्कार है जो किसी भी रिश्ते को मधुर बनाने के साथ ही आपके कार्यक्षेत्र को भी प्रभावी बनाता है।

अक्सर लोग धन्यवाद कहने को औपचारिकता या संस्कृति का हिस्सा ही मानते हैं। जबकि यह शब्द प्रतिदिन के जीवन में हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन जाए तो संबंधों में मजबूती लाता है, साथ ही हमें विनम्र, बेहतर और आत्म संतुष्ट रखने में भी प्रमुख भूमिका निभाता है।

दिमाग का सीधा सम्बन्ध हमारे होने से मानसिक विज्ञान और सकारात्मक मनोविज्ञानों से भी जुड़ा हुआ है। अगर हम सुबह की शुरुआत इस सोच विचार, सोच और शब्दों के साथ करें कि आज हमें कुछ अच्छा करना है, हमें अपने और दूसरों के लिए कुछ करना है तो निश्चित रूप से यह सोच और शब्द हमारे दिन को बेहद सकारात्मक बना देगा।

है, समस्याओं को संभावनाओं में बदल सकता है और चिढ़चिढ़ाहट को जिज्ञासा में बदल सकता है।

जब स्थिति पक्ष में न हो तथा जब ऑफिस में उलझ पूर्णत: मची हो, तो ऐसे में आपको किसी को थैंक्यू कहने या किसी का आभार प्रकट करने की इच्छा नहीं होती है। ऐसे समय में आभार व्यक्त करना अवसर कठिन हो जाता है। लेकिन यही समय किसी को प्रेरित करने के लिए सबसे उपयुक्त होता है। अगर ऐसे समय में आप किसी को ‘धन्यवाद’ बोलते हैं तो यह आपकी मानसिक मजबूत को दर्शाता है, साथ ही यह भी ज़ाहिर होता है कि आप कठिन परिस्थितियों में भी अपना आपा नहीं खोते हैं।

कई बार आप व्यस्त होने की वजह से किसी से प्राप्त मदद या सही सलाह के लिए शुक्रिया अदा नहीं करते। ऐसा भविष्य में न हो, इसके लिए इसे अपनी आदत बनानी होगी। ऐसा तभी संभव है, जब आप हर उस व्यक्ति के प्रति आभार व्यक्त करें जो आपके जीवन को आसान बनाने में मदद करता है। चाहे वह आपके ऑफिस का सहयोगी हो या फिर सफाई कर्मचारी, एक छोटी सी ‘थैंक्यू’ कहने की आदत आपके संबंधों को सशक्त बनाने के लिए भी काफी हो सकती है। इससे नकारात्मक मानसिकता खत्म होती है, आपको मानसिक तौर पर भी सकारात्मक प्रेरणा, विश्वास और ऊर्जा की प्राप्ति होती है। जब आप स्वयं को सकारात्मक ऊर्जा से भर लेते हैं तो आपकी कार्यक्षमता भी बढ़ जाती है।

जब आप दिन की शुरुआत जानते हैं, तो यह आपकी मां-बाप द्वारा दी गई परवरिश और आपकी सोच को दर्शाता है। यह न केवल आपको खुश रखता है बल्कि आपके आस-पास के माहौल को भी खुशनुमा बनाता है। यह आपके व्यक्तित्व को और भी निखारता है। ऐसा करने से, आपका दिन और सकारात्मकता से भरा हुआ बन जाता है।

अशोक कुमार सैनी
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
रुद्रप्रयाग